
1️⃣ ज़मीन खरीदना (भूमि पूजन और पावन शुरुआत)
मंदिर निर्माण की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है — पवित्र भूमि का चयन। फाउंडेशन ने पूर्ण विधिपूर्वक और नियमों के अनुसार ऐसी भूमि का चयन किया जो धार्मिक दृष्टि से उपयुक्त हो। भूमि पूजन कर इस सेवा कार्य का शुभारंभ किया गया, जिसमें स्थानीय समाजजन एवं भक्तों की उपस्थिति रही। यह ज़मीन न केवल मंदिर के लिए, बल्कि भविष्य में होने वाली सामाजिक सेवाओं के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी।
2️⃣ मंदिर निर्माण (धार्मिक परंपरा और वास्तुकला)
ज़मीन की खरीद के पश्चात अब मंदिर निर्माण का कार्य चरणबद्ध रूप से आरंभ हो चुका है। मंदिर की रचना पारंपरिक भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार की जा रही है, जिसमें श्री बालाजी और श्री हनुमानजी के दिव्य स्वरूप को समर्पित एक भव्य गर्भगृह निर्मित किया जाएगा। मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों के लिए सुविधाएं, यज्ञशाला, जल व्यवस्था, एवं वृक्षारोपण भी किया जा रहा है।
3️⃣ मूर्ति स्थापना (प्राण-प्रतिष्ठा और महायज्ञ)
निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत मंदिर में श्री बालाजी और हनुमानजी की दिव्य मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके अंतर्गत वैदिक मंत्रोच्चारण, पंडितों द्वारा विशेष अनुष्ठान और भक्तों के सहयोग से महायज्ञ का आयोजन होगा। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता और आस्था का प्रतीक होगा।
🙏 हम आप सभी श्रद्धालुजनों, समाजसेवियों एवं दानदाताओं से निवेदन करते हैं कि इस पावन कार्य में तन-मन-धन से सहयोग करें और अपने पुण्य का भाग बनें। यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल होगा, बल्कि समाज सेवा, भंडारे, शिक्षा और स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्यों का केंद्र भी बनेगा।
ज्योतिस्वरबालाजी सेवा फाउंडेशन
“समर्पित समाज सेवा के लिए, एक दिव्य पहल”



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